Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.236.26: पंचभूत और अहंकार - इन छह तत्त्वों की आत्मा बुद्धि है। इसे जीतकर मनुष्य समस्त ऐश्वर्यों को प्राप्त कर लेता है और वह योगी पूर्णतः निर्दोष प्रतिभा (शुद्ध दर्शन) को प्राप्त कर लेता है। 26॥ | mahabharat अध्याय 12.236: ध्यानके सहायक योग, उनके फल और सात प्रकारकी धारणाओंका वर्णन तथा सांख्य एवं योगके अनुसार ज्ञानद्वारा मोक्षकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
षण्णामात्मनि बुद्धौ च जितायां प्रभवत्यथ।
निर्दोषप्रतिभा ह्येनं कृत्स्ना समभिवर्तते॥ २६॥
अनुवाद
पंचभूत और अहंकार - इन छह तत्त्वों की आत्मा बुद्धि है। इसे जीतकर मनुष्य समस्त ऐश्वर्यों को प्राप्त कर लेता है और वह योगी पूर्णतः निर्दोष प्रतिभा (शुद्ध दर्शन) को प्राप्त कर लेता है। 26॥
The soul of these six elements – Panchabhuta and Ego – is the intellect. After conquering it, one attains all the opulences and that yogi attains flawless talent (pure philosophy) completely. 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥