Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.236.24-25h: जो व्यक्ति आकाश पर अधिकार कर लेता है, वह आकाश के समान ही आकाश में सर्वव्यापी हो जाता है। उसे अपने शरीर को लुप्त करने की शक्ति प्राप्त हो जाती है। जो जल तत्व पर नियंत्रण कर लेता है, वह अपनी इच्छा मात्र से ही जल के विशाल भण्डार को पी सकता है। | mahabharat अध्याय 12.236: ध्यानके सहायक योग, उनके फल और सात प्रकारकी धारणाओंका वर्णन तथा सांख्य एवं योगके अनुसार ज्ञानद्वारा मोक्षकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो व्यक्ति आकाश पर अधिकार कर लेता है, वह आकाश के समान ही आकाश में सर्वव्यापी हो जाता है। उसे अपने शरीर को लुप्त करने की शक्ति प्राप्त हो जाती है। जो जल तत्व पर नियंत्रण कर लेता है, वह अपनी इच्छा मात्र से ही जल के विशाल भण्डार को पी सकता है।
The person who masters the sky becomes omnipresent in the sky like the sky itself. He acquires the power to make his body disappear. The one who has control over the water element can drink up large reservoirs of water at the mere wish. 24 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥