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mahabharat 12.235.9-10: अग्नि, ब्राह्मण और देवताओं को नमस्कार करके उनकी पूजा करनी चाहिए। कटु वचन नहीं बोलने चाहिए और हिंसा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि वह पाप से युक्त है। यही ब्राह्मणों के लिए निर्धारित पारंपरिक कर्तव्य है॥9-10॥   |   mahabharat अध्याय 12.235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  12.235.9-10 
अग्नींश्च ब्राह्मणांश्चार्चेद् देवता: प्रणमेत च॥ ९॥
वर्जयेदुशतीं वाचं हिंसां चाधर्मसंहिताम्।
एषा पूर्वगता वृत्तिर्ब्राह्मणस्य विधीयते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
अग्नि, ब्राह्मण और देवताओं को नमस्कार करके उनकी पूजा करनी चाहिए। कटु वचन नहीं बोलने चाहिए और हिंसा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि वह पाप से युक्त है। यही ब्राह्मणों के लिए निर्धारित पारंपरिक कर्तव्य है॥9-10॥
 
One should bow down to Agni, Brahmins and Gods and worship them. One should not speak bitter words and should not indulge in violence because it is associated with sin. This is the traditional duty prescribed for Brahmins.॥9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)