श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.235.5 
स्वधर्मेण क्रिया लोके कुर्वाण: सत्यसंगर:।
तिष्ठते तेषु गृहवान् षट्सु कर्मसु स द्विज:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
संसार में अपने धर्म के अनुसार कर्म करना चाहिए और सत्यनिष्ठ रहना चाहिए। गृहस्थ ब्राह्मण को उपर्युक्त छः कर्तव्यों में दृढ़ रहना चाहिए ॥5॥
 
One should perform actions in accordance with his religion in the world and be truthful. A householder Brahmin should remain steadfast in the above mentioned six duties. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)