Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.235.4: ब्राह्मण को चाहिए कि वह किसी भी प्राणी को कष्ट पहुँचाए या उसकी आजीविका नष्ट किए बिना अपनी आजीविका कमाने की इच्छा रखे। उसे संतों की सेवा करके सही ज्ञान प्राप्त करना चाहिए, अच्छा व्यक्ति बनना चाहिए और शास्त्रों की व्याख्या करने में कुशल होना चाहिए।॥4॥ | mahabharat अध्याय 12.235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मण को चाहिए कि वह किसी भी प्राणी को कष्ट पहुँचाए या उसकी आजीविका नष्ट किए बिना अपनी आजीविका कमाने की इच्छा रखे। उसे संतों की सेवा करके सही ज्ञान प्राप्त करना चाहिए, अच्छा व्यक्ति बनना चाहिए और शास्त्रों की व्याख्या करने में कुशल होना चाहिए।॥4॥
A Brahmin should wish to earn his livelihood without harming any living being or destroying its livelihood. He should acquire the right knowledge by serving saints, become a good person and be skilled in interpreting the scriptures.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥