श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.235.30 
एषा पुरातनी वृत्तिर्ब्राह्मणस्य विधीयते।
ज्ञानवत्त्वेन कर्माणि कुर्वन् सर्वत्र सिध्यति॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
यह ब्राह्मणों का प्राचीन व्यवसाय है। जो ब्राह्मण ज्ञानपूर्वक अपने कर्तव्यों का पालन करता है, उसे सर्वत्र सफलता प्राप्त होती है। 30.
 
This is the ancient profession of Brahmins. A Brahmin who performs his duties with knowledge attains success everywhere. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)