vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना
»
श्लोक 30
श्लोक
12.235.30
एषा पुरातनी वृत्तिर्ब्राह्मणस्य विधीयते।
ज्ञानवत्त्वेन कर्माणि कुर्वन् सर्वत्र सिध्यति॥ ३०॥
अनुवाद
यह ब्राह्मणों का प्राचीन व्यवसाय है। जो ब्राह्मण ज्ञानपूर्वक अपने कर्तव्यों का पालन करता है, उसे सर्वत्र सफलता प्राप्त होती है। 30.
This is the ancient profession of Brahmins. A Brahmin who performs his duties with knowledge attains success everywhere. 30.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×