Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.235.29: जो ब्राह्मण धैर्यवान, प्रमादरहित, बुद्धिमान, धार्मिक, मनस्वी तथा हर्ष, अभिमान और क्रोध से रहित है, वह कभी दुःखी नहीं होता॥29॥   |   mahabharat अध्याय 12.235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.235.29 
धृतिमानप्रमत्तश्च दान्तो धर्मविदात्मवान्।
वीतहर्षमदक्रोधो ब्राह्मणो नावसीदति॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण धैर्यवान, प्रमादरहित, बुद्धिमान, धार्मिक, मनस्वी तथा हर्ष, अभिमान और क्रोध से रहित है, वह कभी दुःखी नहीं होता॥29॥
 
The Brahmin who is patient, free from carelessness, intelligent, religious, mindful and free from joy, pride and anger never experiences sadness. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)