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mahabharat 12.235.28: जो मनुष्य अपने धर्म के अनुसार आचरण करता है, भक्त है, मन और इन्द्रियों को वश में रखता है, विद्वान है, किसी का दोष नहीं देखता तथा धर्म-अधर्म में पारंगत है, वह सब दुःखों से पार हो जाता है ॥28॥   |   mahabharat अध्याय 12.235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.235.28 
क्रियावान् श्रद्दधानो हि दान्त: प्राज्ञोऽनसूयक:।
धर्माधर्मविशेषज्ञ: सर्वं तरति दुस्तरम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अपने धर्म के अनुसार आचरण करता है, भक्त है, मन और इन्द्रियों को वश में रखता है, विद्वान है, किसी का दोष नहीं देखता तथा धर्म-अधर्म में पारंगत है, वह सब दुःखों से पार हो जाता है ॥28॥
 
One who acts according to his dharma, is devout, keeps his mind and senses under control, is learned, does not see anyone's fault and is an expert in righteousness and unrighteousness, he transcends all sorrows. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)