Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.235.27: ब्राह्मण को वेदों का विद्वान, तत्वदर्शी, गुणवान और चतुर होना चाहिए। उसे अपने धर्म के अनुसार आचरण करना चाहिए, परंतु अपने कर्मों से वर्णसंकरता नहीं फैलानी चाहिए, अर्थात् अपने धर्म और दूसरे धर्म को मिलाना नहीं चाहिए। 27॥ | mahabharat अध्याय 12.235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मण को वेदों का विद्वान, तत्वदर्शी, गुणवान और चतुर होना चाहिए। उसे अपने धर्म के अनुसार आचरण करना चाहिए, परंतु अपने कर्मों से वर्णसंकरता नहीं फैलानी चाहिए, अर्थात् अपने धर्म और दूसरे धर्म को मिलाना नहीं चाहिए। 27॥
A Brahmin should be a scholar of Vedas, a philosopher, virtuous and clever. He should act according to his dharma, but should not spread hybridity through his actions, that is, he should not mix his own dharma and other dharma. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥