श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.235.26 
सतां धर्मेण वर्तेत क्रियां शिष्टवदाचरेत्।
असंरोधेन लोकस्य वृत्तिं लिप्सेदगर्हिताम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य को चाहिए कि वह श्रेष्ठ पुरुषों के धर्म का पालन करे, शिष्टाचार का पालन करे तथा ऐसी जीविका की आकांक्षा करे जिससे दूसरों की जीविका को हानि न पहुँचे तथा जिसकी संसार में निन्दा न हो ॥26॥
 
One should follow the religion of the noble men and observe etiquette and aspire to such a livelihood which does not harm the livelihood of others and which is not criticized in the world. ॥26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)