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mahabharat 12.235.21: जिसके पास ज्ञानरूपी नाव नहीं है, वह मोहग्रस्त मूर्ख महान पाप करता है। कामरूपी मगरमच्छ से ग्रस्त होने के कारण, ज्ञान भी उसके लिए नाव नहीं बन सकता ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 12.235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.235.21 
अप्लवो हि महादोषं मुह्यमानो नियच्छति।
कामग्राहगृहीतस्य ज्ञानमप्यस्य न प्लव:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जिसके पास ज्ञानरूपी नाव नहीं है, वह मोहग्रस्त मूर्ख महान पाप करता है। कामरूपी मगरमच्छ से ग्रस्त होने के कारण, ज्ञान भी उसके लिए नाव नहीं बन सकता ॥21॥
 
The deluded fool who does not have the boat of knowledge, commits a great sin. Due to being afflicted by the crocodile of lust, even knowledge cannot become a boat for him. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)