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mahabharat 12.235.20: जो मनुष्य कामनाओं में लीन है, चंचल मन वाला है, मंदबुद्धि और अज्ञानी है, वह संशय के कारण कालनादी को पार नहीं कर सकता और जो स्थिर बैठा रहता है, वह भी उसे पार नहीं कर सकता।   |   mahabharat अध्याय 12.235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.235.20 
संशयं स तु कामात्मा चलचित्तोऽल्पचेतन:।
अप्राज्ञो न तरत्येनं यो ह्यास्ते न स गच्छति॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य कामनाओं में लीन है, चंचल मन वाला है, मंदबुद्धि और अज्ञानी है, वह संशय के कारण कालनादी को पार नहीं कर सकता और जो स्थिर बैठा रहता है, वह भी उसे पार नहीं कर सकता।
 
A man who is engrossed in desires, has a fickle mind, is dull-witted and ignorant, is unable to cross the river Kalanadi due to doubts. And one who sits motionless cannot cross it either.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)