श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  12.235.2-3 
वेदवादेषु कुशला ह्यध्यात्मकुशलाश्च ये॥ २॥
सत्त्ववन्तो महाभागा: पश्यन्ति प्रभवाप्ययौ।
एवं धर्मेण वर्तेत क्रियां शिष्टवदाचरेत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जो वेदों के प्रवचन में पारंगत हैं, आध्यात्मिक ज्ञान में निपुण हैं, सतोगुण से युक्त हैं और परम भाग्यशाली हैं, वे संसार की उत्पत्ति और प्रलय को ठीक से जानते हैं; इसलिए ब्राह्मण को चाहिए कि वह धर्मानुसार आचरण करे और सभ्य पुरुषों के सद्व्यवहार का पालन करे॥ 2-3॥
 
Those who are proficient in the discourse of the Vedas, adept in spiritual knowledge, endowed with the virtues of goodness and extremely fortunate, know exactly about the creation and destruction of the world; therefore, a Brahmin should behave in accordance with the Dharma and follow the good conduct of civilized persons.॥ 2-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)