श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.235.19 
उपपन्नं हि यत् प्राज्ञो निस्तरेन्नेतरो जन:।
दूरतो गुणदोषौ हि प्राज्ञ: सर्वत्र पश्यति॥ १९॥
 
 
अनुवाद
यह तर्क संगत है कि विद्वान् पुरुष काल रूपी नदी को पार कर जाता है, जबकि अज्ञानी पुरुष नहीं; क्योंकि ज्ञानी पुरुष दूर से ही सर्वत्र गुण-दोष देख लेता है ॥19॥
 
It is logical that a learned man crosses the river of time while an ignorant man does not; because a wise man can see the virtues and faults everywhere from a distance. ॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)