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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना
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श्लोक 18
श्लोक
12.235.18
एतत् प्रज्ञामयैर्धीरा निस्तरन्ति मनीषिण:।
प्लवैरप्लववन्तो हि किं करिष्यन्त्यचेतस:॥ १८॥
अनुवाद
बुद्धिमान और धैर्यवान पुरुष ज्ञानरूपी नावों द्वारा मृत्युरूपी नदी को पार करते हैं। वे मूर्ख पुरुष क्या करेंगे जिनके पास ऐसी नाव नहीं है?॥18॥
Wise and patient men cross the river of death in boats of wisdom. What will those unwise men do who do not have such boats?॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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