श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.235.13 
महता विधिदृष्टेन बलेनाप्रतिघातिना।
स्वभावस्रोतसा वृत्तमुह्यते सततं जगत‍् ॥ १३॥
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण जगत् उस प्रकृति के प्रवाह में निरन्तर बह रहा है जो महान् है, जिसे केवल सृष्टिकर्ता ही देख सकता है और जिसकी शक्ति कहीं भी बाधित नहीं हो सकती। ॥13॥
 
The entire world is constantly flowing in the flow of that nature which is great, which can only be seen by the Creator and whose power cannot be obstructed anywhere. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)