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mahabharat 12.235.11-12: कर्मों का सार जानकर और उन्हें करने से मनुष्य निश्चय ही सफलता प्राप्त कर सकता है। इस संसार में जीवन एक भयंकर नदी के समान है। पाँचों इन्द्रियाँ इस नदी का जल हैं। लोभ इसका किनारा है। क्रोध इसके भीतर का कीचड़ है। इसे पार करना अत्यंत कठिन है और इसके वेग को नियंत्रित करना असंभव है, परन्तु बुद्धिमान पुरुष इसे पार कर जाता है। जीवों को लुभाने वाला काल सदैव आक्रमण करने के लिए तत्पर रहता है। इसे सदैव ध्यान में रखो। ॥11-12॥   |   mahabharat अध्याय 12.235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 235: ब्राह्मणके कर्तव्यका प्रतिपादन करते हुए कालरूप नदको पार करनेका उपाय बतलाना  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  12.235.11-12 
ज्ञानागमेन कर्माणि कुर्वन् कर्मसु सिध्यति।
पञ्चेन्द्रियजलां घोरां लोभकूलां सुदुस्तराम्॥ ११॥
मन्युपङ्कामनाधृष्यां नदीं तरति बुद्धिमान्।
कालमभ्युद्यतं पश्येन्नित्यमत्यन्तमोहनम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
कर्मों का सार जानकर और उन्हें करने से मनुष्य निश्चय ही सफलता प्राप्त कर सकता है। इस संसार में जीवन एक भयंकर नदी के समान है। पाँचों इन्द्रियाँ इस नदी का जल हैं। लोभ इसका किनारा है। क्रोध इसके भीतर का कीचड़ है। इसे पार करना अत्यंत कठिन है और इसके वेग को नियंत्रित करना असंभव है, परन्तु बुद्धिमान पुरुष इसे पार कर जाता है। जीवों को लुभाने वाला काल सदैव आक्रमण करने के लिए तत्पर रहता है। इसे सदैव ध्यान में रखो। ॥11-12॥
 
By knowing the essence of actions and performing them, one can certainly achieve success. Life in this world is like a terrible river. The five senses are the water of this river. Greed is the bank. Anger is the mud inside it. It is very difficult to cross it and it is impossible to control its speed, but a wise man crosses it. Time, which tempts living beings, is always ready to attack. Always keep this in mind. ॥11-12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)