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mahabharat 12.234.8: इस पृथ्वी पर जो भी स्थान पवित्र और उत्तम प्रतीत हो, वहीं निवास करे। उसी स्थान पर रहकर उत्तम यश के लिए स्वयं को आदर्श पुरुष बनाने का प्रयत्न करे। 8॥   |   mahabharat अध्याय 12.234: ब्राह्मणोंका कर्तव्य और उन्हें दान देनेकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 234: ब्राह्मणोंका कर्तव्य और उन्हें दान देनेकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.234.8 
यत् पृथिव्यां पुण्यतमं विद्यात् स्थानं तदावसेत्।
यतेत तस्मिन् प्रामाण्यं गन्तुं यशसि चोत्तमे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
इस पृथ्वी पर जो भी स्थान पवित्र और उत्तम प्रतीत हो, वहीं निवास करे। उसी स्थान पर रहकर उत्तम यश के लिए स्वयं को आदर्श पुरुष बनाने का प्रयत्न करे। 8॥
 
Whatever place on this earth seems sacred and good, reside there. Staying in the same place, he should try to make himself an ideal man for good fame. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)