Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.234.6: यह गृहस्थाश्रम समस्त धर्मों का मूल कहा गया है। यहाँ निवास करने से आसक्ति आदि आंतरिक दोषों का नाश हो जाने पर, अपनी इन्द्रियों को वश में करने वाला मनुष्य सर्वत्र सिद्धि प्राप्त करता है। ॥6॥ | mahabharat अध्याय 12.234: ब्राह्मणोंका कर्तव्य और उन्हें दान देनेकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गृहस्थस्त्वेष धर्माणां सर्वेषां मूलमुच्यते।
यत्र पक्वकषायो हि दान्त: सर्वत्र सिध्यति॥ ६॥
अनुवाद
यह गृहस्थाश्रम समस्त धर्मों का मूल कहा गया है। यहाँ निवास करने से आसक्ति आदि आंतरिक दोषों का नाश हो जाने पर, अपनी इन्द्रियों को वश में करने वाला मनुष्य सर्वत्र सिद्धि प्राप्त करता है। ॥6॥
This grihastha-ashram is said to be the root of all religions. By living here, when the inner defects like attachment etc. are eradicated, a person who has controlled his senses attains success everywhere. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥