श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 234: ब्राह्मणोंका कर्तव्य और उन्हें दान देनेकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  12.234.37 
एते चान्ये च बहवो दानेन तपसैव च।
महात्मानो गता: स्वर्गं शिष्टात्मानो जितेन्द्रिया:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
ये तथा अन्य अनेक उत्तम स्वभाववाले जितेन्द्रिय महात्मा दान और तप के द्वारा स्वर्ग को गये ॥37॥
 
These and many other noble-natured Jitendriya Mahatmas went to heaven through charity and penance. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)