श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 234: ब्राह्मणोंका कर्तव्य और उन्हें दान देनेकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.234.36 
दत्त्वा शतसहस्रं तु गवां राजा प्रसेनजित्।
सवत्सानां महातेजा गतो लोकाननुत्तमान्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
तेजस्वी राजा प्रसेनजित् ने एक लाख गौएँ दान करके उत्तम लोक प्राप्त किया था ॥36॥
 
The brilliant king Prasenjit had attained the best world by donating one lakh 100,000 cows. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)