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mahabharat 12.234.32: महाराज शतद्युम्न मुद्गल ब्राह्मण को समस्त भोगों से परिपूर्ण सुवर्णमय भवन देकर स्वर्ग को चले गए थे ॥32॥   |   mahabharat अध्याय 12.234: ब्राह्मणोंका कर्तव्य और उन्हें दान देनेकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 234: ब्राह्मणोंका कर्तव्य और उन्हें दान देनेकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.234.32 
सर्वकामैश्च सम्पूर्णं दत्त्वा वेश्म हिरण्मयम्।
मुद्‍गलाय गत: स्वर्गं शतद्युम्नो महीपति:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
महाराज शतद्युम्न मुद्गल ब्राह्मण को समस्त भोगों से परिपूर्ण सुवर्णमय भवन देकर स्वर्ग को चले गए थे ॥32॥
 
Maharaja Shatadyumna had gone to heaven after giving a golden mansion full of all the enjoyments to the Mudgal Brahmin. 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)