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mahabharat 12.234.31: महामुनि राजर्षि सहस्रजित ब्राह्मण के लिए अपने प्रिय प्राण त्यागकर उत्तम लोकों को चले गए ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 12.234: ब्राह्मणोंका कर्तव्य और उन्हें दान देनेकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 234: ब्राह्मणोंका कर्तव्य और उन्हें दान देनेकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.234.31 
सहस्रजिच्च राजर्षि: प्राणानिष्टान् महायशा:।
ब्राह्मणार्थं परित्यज्य गतो लोकाननुत्तमान्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
महामुनि राजर्षि सहस्रजित ब्राह्मण के लिए अपने प्रिय प्राण त्यागकर उत्तम लोकों को चले गए ॥31॥
 
The great sage Rajarshi sacrificed his dear life for Sahasrajit Brahmin and went to the best worlds. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)