श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 234: ब्राह्मणोंका कर्तव्य और उन्हें दान देनेकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.234.30 
राजा मित्रसहश्चापि वसिष्ठाय महात्मने।
मदयन्तीं प्रियां दत्त्वा तया सह दिवं गत:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
राजा मित्रासन ने अपनी प्रिय रानी मदयन्ती को महात्मा वसिष्ठ को देकर उसके साथ स्वर्गलोक में प्रवेश किया था ॥30॥
 
King Mitrasana had given his beloved queen Madayanti to Mahatma Vasishtha and entered the heavenly world along with her. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)