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mahabharat 12.234.27: एक समय जब वर्षा नहीं हुई, तब महर्षि वशिष्ठ ने प्राणियों की रचना करने वाले द्वितीय प्रजापति के समान समस्त लोगों को जीवनदान दिया॥27॥   |   mahabharat अध्याय 12.234: ब्राह्मणोंका कर्तव्य और उन्हें दान देनेकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 234: ब्राह्मणोंका कर्तव्य और उन्हें दान देनेकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.234.27 
अवर्षति च पर्जन्ये सर्वभूतानि भूतकृत्।
वसिष्ठो जीवयामास प्रजापतिरिव प्रजा:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
एक समय जब वर्षा नहीं हुई, तब महर्षि वशिष्ठ ने प्राणियों की रचना करने वाले द्वितीय प्रजापति के समान समस्त लोगों को जीवनदान दिया॥27॥
 
Once when it did not rain, Maharishi Vashishtha gave life to all the people like the second Prajapati who created the living beings. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)