श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 234: ब्राह्मणोंका कर्तव्य और उन्हें दान देनेकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.234.20 
प्रतर्दन: काशिपति: प्रदाय नयने स्वके।
ब्राह्मणायातुलां कीर्तिमिह चामुत्र चाश्नुते॥ २०॥
 
 
अनुवाद
काशी के राजा प्रतर्दन ने एक ब्राह्मण को अपने दोनों नेत्र दान करके इस लोक में अद्वितीय यश प्राप्त किया तथा परलोक में परम सुख भोगा।
 
By donating both his eyes to a Brahmin, King Pratardana of Kashi achieved unparalleled fame in this world and he enjoys supreme pleasures in the next world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)