श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 234: ब्राह्मणोंका कर्तव्य और उन्हें दान देनेकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.234.1 
व्यास उवाच
भूतग्रामे नियुक्तं यत् तदेतत् कीर्तितं मया।
ब्राह्मणस्य तु यत् कृत्यं तत् ते वक्ष्यामि तच्छृणु॥ १॥
 
 
अनुवाद
व्यासजी बोले, "पुत्र! भूतसमादायक के विषय में तुमने जो प्रश्न पूछा था, उसके उत्तर में मैंने यह सब तुमसे कहा है। अब मैं तुम्हें ब्राह्मण का कर्तव्य बताता हूँ, सुनो।"
 
Vyasa said, "Son! I have told you all this in reply to the question you had asked about the Bhutasamadayaka. Now I am telling you the duty of a Brahmin, listen." 1.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)