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mahabharat 12.233.9: तब वायु तत्व अग्नि का रूप धारण कर लेता है। इससे अग्नि बुझ जाती है और वायु में मिल जाती है। फिर वायु अपने प्रचण्ड वेग से सम्पूर्ण आकाश को व्याकुल कर देती है।॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.233: ब्राह्मप्रलय एवं महाप्रलयका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 233: ब्राह्मप्रलय एवं महाप्रलयका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.233.9 
ज्योतिषोऽपि गुणं रूपं वायुराददते यदा।
प्रशाम्यति ततो ज्योतिर्वायुर्दोधूयते महान्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तब वायु तत्व अग्नि का रूप धारण कर लेता है। इससे अग्नि बुझ जाती है और वायु में मिल जाती है। फिर वायु अपने प्रचण्ड वेग से सम्पूर्ण आकाश को व्याकुल कर देती है।॥9॥
 
Then the air element takes the form of the quality of fire. Due to this the fire is extinguished and it merges with the air. Then the air disturbs the entire sky with its great speed.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)