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mahabharat 12.233.8: उस समय जब अग्नि की लपटें सूर्य को घेर लेती हैं और उसे सब ओर से ढक लेती हैं, तब सारा आकाश लपटों से व्याप्त और प्रज्वलित प्रतीत होता है ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.233: ब्राह्मप्रलय एवं महाप्रलयका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 233: ब्राह्मप्रलय एवं महाप्रलयका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.233.8 
यदाऽऽदित्यं स्थितं मध्ये गूहन्ति शिखिनोऽर्चिष:।
सर्वमेवेदमर्चिर्भि: पूर्णं जाज्वल्यते नभ:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उस समय जब अग्नि की लपटें सूर्य को घेर लेती हैं और उसे सब ओर से ढक लेती हैं, तब सारा आकाश लपटों से व्याप्त और प्रज्वलित प्रतीत होता है ॥8॥
 
At that time, when the flames of the fire engulf the Sun and cover it from all sides, then the entire sky seems to be pervaded by the flames and is blazing. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)