vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 233: ब्राह्मप्रलय एवं महाप्रलयका वर्णन
»
श्लोक 7
श्लोक
12.233.7
अपामपि गुणं तात ज्योतिराददते यदा।
आपस्तदा त्वात्तगुणा ज्योति:षूपरमन्ति वै॥ ७॥
अनुवाद
तत्पश्चात् प्रकाश जल के गुणों को अवशोषित कर लेता है और रसहीन जल प्रकाश में लीन हो जाता है ॥7॥
Thereafter the light absorbs the qualities of water and the juiceless water gets absorbed in the light. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×