श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 233: ब्राह्मप्रलय एवं महाप्रलयका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.233.7 
अपामपि गुणं तात ज्योतिराददते यदा।
आपस्तदा त्वात्तगुणा ज्योति:षूपरमन्ति वै॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् प्रकाश जल के गुणों को अवशोषित कर लेता है और रसहीन जल प्रकाश में लीन हो जाता है ॥7॥
 
Thereafter the light absorbs the qualities of water and the juiceless water gets absorbed in the light. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)