श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 233: ब्राह्मप्रलय एवं महाप्रलयका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.233.5 
भूमेरपि गुणं गन्धमाप आददते यदा।
आत्तगन्धा तदा भूमि: प्रलयत्वाय कल्पते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् जब जल पृथ्वी की गंध को सोख लेता है, तब पृथ्वी गंधहीन होकर अपने कारण जल में लीन हो जाती है ॥5॥
 
Thereafter when water absorbs the odour of the earth, then the earth, becoming odourless, merges into its cause, water. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)