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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 233: ब्राह्मप्रलय एवं महाप्रलयका वर्णन
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श्लोक 4
श्लोक
12.233.4
तत: प्रलीने सर्वस्मिन् स्थावरे जङ्गमे तथा।
निर्वृक्षा निस्तृणा भूमिर्दृश्यते कूर्मपृष्ठवत्॥ ४॥
अनुवाद
तत्पश्चात् जब समस्त स्थावर-जंगम प्राणी लुप्त हो जाते हैं, तब यह घास और वृक्षों से रहित भूमि कछुए की पीठ के समान प्रतीत होने लगती है ॥4॥
Thereafter when all the mobile and immobile creatures disappear, this land devoid of grass and trees begins to look like the back of a tortoise. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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