श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 233: ब्राह्मप्रलय एवं महाप्रलयका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.233.2 
दिवि सूर्यस्तथा सप्त दहन्ति शिखिनोऽर्चिष:।
सर्वमेतत् तदार्चिर्भि: पूर्णं जाज्वल्यते जगत‍्॥ २॥
 
 
अनुवाद
जब प्रलय का समय आता है, तब ऊपर से सूर्य और नीचे से अग्नि की सात ज्वालाएँ जगत् को भस्म करने लगती हैं। उस समय सारा जगत् ज्वालाओं से प्रज्वलित दिखाई देता है॥2॥
 
When the time of Pralaya (destruction) comes, the Sun from above and the seven flames of fire from below start consuming the world. At that time, the whole world appears blazing with flames.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)