श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 233: ब्राह्मप्रलय एवं महाप्रलयका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.233.14 
तदात्मगुणमाविश्य मनो ग्रसति चन्द्रमा:।
मनस्युपरते चापि चन्द्रमस्युपतिष्ठते॥ १४॥
 
 
अनुवाद
महाप्रलय के समय चन्द्रमा व्यक्त मन को आत्मगुण में प्रविष्ट कर उसे स्वयं ग्रस लेता है। तब मन विरक्त (शान्त) हो जाता है; तब वह चन्द्रमा में स्थित रहता है।॥14॥
 
At the time of Mahapralaya, the moon enters the manifested mind into the Atma Guna and swallows it itself. Then the mind becomes detached (peaceful); then it remains present in the moon.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)