Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.233.11: इसके बाद आकाश वायु के स्पर्श-गुण को ग्रहण कर लेता है। फिर वायु शान्त होकर आकाश में विलीन हो जाती है; फिर आकाश महाशब्द से परिपूर्ण होकर अकेला रह जाता है ॥11॥ | mahabharat अध्याय 12.233: ब्राह्मप्रलय एवं महाप्रलयका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसके बाद आकाश वायु के स्पर्श-गुण को ग्रहण कर लेता है। फिर वायु शान्त होकर आकाश में विलीन हो जाती है; फिर आकाश महाशब्द से परिपूर्ण होकर अकेला रह जाता है ॥11॥
After this, the sky absorbs the quality of touch of the air. Then the air becomes calm and merges with the sky; then the sky remains alone, filled with the great sound. ॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥