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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 233: ब्राह्मप्रलय एवं महाप्रलयका वर्णन
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श्लोक 10
श्लोक
12.233.10
ततस्तु स्वनमासाद्य वायु: सम्भवमात्मन:।
अधश्चोर्ध्वं च तिर्यक् च दोधवीति दिशो दश॥ १०॥
अनुवाद
वह ऊपर-नीचे, इधर-उधर, सब दिशाओं में जोर-जोर से हिलने लगता है और अपने वेग से उत्पन्न ध्वनि को फैलाता है।॥10॥
It begins to move, up and down, here and there in all directions, waving violently and spreading the sound produced by its velocity.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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