श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 233: ब्राह्मप्रलय एवं महाप्रलयका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.233.1 
व्यास उवाच
प्रत्याहारं तु वक्ष्यामि शर्वर्यादौ गतेऽहनि।
यथेदं कुरुतेऽध्यात्मं सुसूक्ष्मं विश्वमीश्वर:॥ १॥
 
 
अनुवाद
व्यासजी बोले, "बेटा! अब मैं तुम्हें बताता हूँ कि ब्रह्माजी का दिन समाप्त होने पर और रात्रि आरम्भ होने से पहले यह जगत किस प्रकार नष्ट हो जाता है, तथा जगत के स्वामी ब्रह्माजी किस प्रकार स्थूल जगत को अत्यन्त सूक्ष्म बनाकर अपने अन्दर समाहित कर लेते हैं।"॥1॥
 
Vyasa said, "Son, I am now telling you how this universe is destroyed after Brahma's day is over and before his night begins, and how the Lord of the world, Brahma, makes the gross universe extremely subtle and absorbs it within himself." ॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)