Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.232.37: सत्ययुग में जिस चतुर्चरणीय धर्म की चर्चा की गई है, वह अन्य युगों में भी मन को वश में करने वाले तपस्वियों और वेद-वेदान्त में पारंगत ब्राह्मणों में प्रचलित पाया जाता है ॥ 37॥ | mahabharat अध्याय 12.232: व्यासजीका शुकदेवको सृष्टिके उत्पत्ति-क्रम तथा युगधर्मोंका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सत्ययुग में जिस चतुर्चरणीय धर्म की चर्चा की गई है, वह अन्य युगों में भी मन को वश में करने वाले तपस्वियों और वेद-वेदान्त में पारंगत ब्राह्मणों में प्रचलित पाया जाता है ॥ 37॥
The four-stage religion discussed in Satya-yuga is found to be prevalent in other ages too among the ascetics who have controlled their minds and the Brahmins who are well versed in the Vedas and Vedanta. ॥ 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥