Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.232.29: शीत, उष्ण आदि नाना द्वन्द्वों से देहधारी जीव को जो दुःख प्राप्त होता है, वह कर्म के कारण ही होता है। मनुष्य तत्त्वज्ञान द्वारा उस द्वन्द्व का त्याग कर देता है और ज्ञान के द्वारा आत्मसाक्षात्कार (मोक्ष) को प्राप्त करता है। 29॥ | mahabharat अध्याय 12.232: व्यासजीका शुकदेवको सृष्टिके उत्पत्ति-क्रम तथा युगधर्मोंका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शीत, उष्ण आदि नाना द्वन्द्वों से देहधारी जीव को जो दुःख प्राप्त होता है, वह कर्म के कारण ही होता है। मनुष्य तत्त्वज्ञान द्वारा उस द्वन्द्व का त्याग कर देता है और ज्ञान के द्वारा आत्मसाक्षात्कार (मोक्ष) को प्राप्त करता है। 29॥
The suffering that a body-conscious creature receives from these different dualities like cold, heat etc. is due to karma. Man gives up that duality through philosophical knowledge and attains self-realization (moksha) with the help of knowledge. 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥