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mahabharat 12.232.26-27h: वेदों में केवल ऋषियों के ही नाम नहीं हैं, अपितु ब्रह्माण्ड में उत्पन्न सभी वस्तुओं के नाम भी हैं। अपनी रात्रि के अंत में, अर्थात् नवीन ब्रह्माण्ड के उदय होने पर, अजन्मा ब्रह्मा अपने द्वारा निर्मित सभी वस्तुओं का नाम दूसरों को देते हैं। 26 1/2।   |   mahabharat अध्याय 12.232: व्यासजीका शुकदेवको सृष्टिके उत्पत्ति-क्रम तथा युगधर्मोंका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 232: व्यासजीका शुकदेवको सृष्टिके उत्पत्ति-क्रम तथा युगधर्मोंका उपदेश  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  12.232.26-27h 
नामधेयानि चर्षीणां याश्च वेदेषु सृष्टय:॥ २६॥
शर्वर्यन्ते सुजातानामन्येभ्यो विदधात्यज:।
 
 
अनुवाद
वेदों में केवल ऋषियों के ही नाम नहीं हैं, अपितु ब्रह्माण्ड में उत्पन्न सभी वस्तुओं के नाम भी हैं। अपनी रात्रि के अंत में, अर्थात् नवीन ब्रह्माण्ड के उदय होने पर, अजन्मा ब्रह्मा अपने द्वारा निर्मित सभी वस्तुओं का नाम दूसरों को देते हैं। 26 1/2।
 
In the Vedas, not only the names of the sages are there but also the names of all the things created in the universe. At the end of his night, that is, at the dawn of the new universe, the unborn Brahma names all the things created by him to others. 26 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)