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mahabharat 12.232.23: तप के द्वारा वह उस दिव्य शक्ति को भी प्राप्त कर लेता है जिससे इस संसार की रचना होती है। तप के द्वारा मनुष्य सर्वोच्च बन जाता है और समस्त जीवों पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लेता है। 23॥   |   mahabharat अध्याय 12.232: व्यासजीका शुकदेवको सृष्टिके उत्पत्ति-क्रम तथा युगधर्मोंका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 232: व्यासजीका शुकदेवको सृष्टिके उत्पत्ति-क्रम तथा युगधर्मोंका उपदेश  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.232.23 
तपसा तदवाप्नोति यद्भूतं सृजते जगत‍्।
स तद्भूतश्च सर्वेषां भूतानां भवति प्रभु:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तप के द्वारा वह उस दिव्य शक्ति को भी प्राप्त कर लेता है जिससे इस संसार की रचना होती है। तप के द्वारा मनुष्य सर्वोच्च बन जाता है और समस्त जीवों पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लेता है। 23॥
 
Through penance he also attains that divine power which creates this world. Through penance, man becomes supreme and establishes his dominance over all living beings. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)