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mahabharat 12.232.14-15: तत्पश्चात् ब्रह्मा ही जीवों की रचना करते हैं। वे ही देवताओं, ऋषियों, पितरों, मनुष्यों, नाना प्रकार के लोकों, नदियों, समुद्रों, दिशाओं, पर्वतों, वनस्पतियों, किन्नरों, राक्षसों, पशु-पक्षियों, मृगों और सर्पों की भी रचना करते हैं। अक्षय आकाश आदि और नाशवान जीवों की भी रचना ब्रह्मा ने ही की है। 14-15॥   |   mahabharat अध्याय 12.232: व्यासजीका शुकदेवको सृष्टिके उत्पत्ति-क्रम तथा युगधर्मोंका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 232: व्यासजीका शुकदेवको सृष्टिके उत्पत्ति-क्रम तथा युगधर्मोंका उपदेश  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  12.232.14-15 
स वै सृजति भूतानि स्थावराणि चराणि च।
तत: स सृजति ब्रह्मा देवर्षिपितृमानवान्॥ १४॥
लोकान् नदी: समुद्रांश्च दिश: शैलान् वनस्पतीन्।
नरकिन्नररक्षांसि वय:पशुमृगोरगान्।
अव्ययं च व्ययं चैव द्वयं स्थावरजङ्गमम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् ब्रह्मा ही जीवों की रचना करते हैं। वे ही देवताओं, ऋषियों, पितरों, मनुष्यों, नाना प्रकार के लोकों, नदियों, समुद्रों, दिशाओं, पर्वतों, वनस्पतियों, किन्नरों, राक्षसों, पशु-पक्षियों, मृगों और सर्पों की भी रचना करते हैं। अक्षय आकाश आदि और नाशवान जीवों की भी रचना ब्रह्मा ने ही की है। 14-15॥
 
Thereafter, it is Brahma who creates living beings. He also creates the gods, sages, ancestors, humans, different types of worlds, rivers, seas, directions, mountains, vegetation, eunuchs, demons, animals, birds, deer and snakes. The inexhaustible sky etc. and the perishable living creatures were also created by him. 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)