Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.232.11: परन्तु जब ये सातों विश्वभूत मिलकर ईश्वर की इच्छा के अनुसार एक दूसरे से सहयोग करने लगे, तब ये भिन्न-भिन्न शरीरों में परिवर्तित हो गए। उस शरीर नामक नगर में निवास करने के कारण आत्मा को पुरुष कहा गया है। ॥11॥ | mahabharat अध्याय 12.232: व्यासजीका शुकदेवको सृष्टिके उत्पत्ति-क्रम तथा युगधर्मोंका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ते समेत्य महात्मानो ह्यन्योन्यमभिसंश्रिता:।
शरीराश्रयणं प्राप्तास्तत: पुरुष उच्यते॥ ११॥
अनुवाद
परन्तु जब ये सातों विश्वभूत मिलकर ईश्वर की इच्छा के अनुसार एक दूसरे से सहयोग करने लगे, तब ये भिन्न-भिन्न शरीरों में परिवर्तित हो गए। उस शरीर नामक नगर में निवास करने के कारण आत्मा को पुरुष कहा गया है। ॥11॥
But when these seven universal elements joined together and cooperated with each other as per God's will, they transformed into different body shapes. Due to residing in that city called body, the soul is called Purusha. ॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥