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श्रीशुक उवाच
भूतग्रामस्य कर्तारं कालज्ञाने च निश्चयम्।
ब्राह्मणस्य च यत् कृत्यं तद् भवान् वक्तुमर्हति॥ ९॥
अनुवाद
श्री शुकदेवजी बोले - पिताश्री ! समस्त प्राणियों का रचयिता कौन है ? काल के ज्ञान के विषय में आपकी क्या राय है ? तथा ब्राह्मण का कर्तव्य क्या है ? कृपा करके मुझे ये सब बातें बताइए ॥9॥
Shri Shukdevji said – Father! Who is the creator of all living beings? What is your opinion regarding the knowledge of time? And what is the duty of a Brahmin? Please tell me all these things. 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥