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mahabharat 12.231.31: जो लोग ब्रह्मा के एक दिन की अवधि, जो एक हजार चतुर्युग के बराबर कही गई है, तथा उनकी रात्रि की अवधि, जो इतनी ही लंबी कही गई है, को ठीक से जानते हैं, वे ही दिन और रात को, अर्थात् समय के सार को जानते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.231: शुकदेवजीका प्रश्न और व्यासजीका उनके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए कालका स्वरूप बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 231: शुकदेवजीका प्रश्न और व्यासजीका उनके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए कालका स्वरूप बताना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.231.31 
सहस्रयुगपर्यन्तमहर्यद्‍ब्रह्मणो विदु:।
रात्रिं युगसहस्रान्तां तेऽहोरात्रविदो जना:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
जो लोग ब्रह्मा के एक दिन की अवधि, जो एक हजार चतुर्युग के बराबर कही गई है, तथा उनकी रात्रि की अवधि, जो इतनी ही लंबी कही गई है, को ठीक से जानते हैं, वे ही दिन और रात को, अर्थात् समय के सार को जानते हैं।
 
Those who know correctly the length of one day of Brahma which is said to be one thousand Chaturyuga and the length of his night which is said to be equally long, they alone know the day and night i.e. the essence of time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)