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mahabharat 12.231.27: युगों के अनुसार सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग में मनुष्यों का धर्म भी भिन्न-भिन्न हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 12.231: शुकदेवजीका प्रश्न और व्यासजीका उनके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए कालका स्वरूप बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 231: शुकदेवजीका प्रश्न और व्यासजीका उनके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए कालका स्वरूप बताना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.231.27 
अन्ये कृतयुगे धर्मास्त्रेतायां द्वापरेऽपरे।
अन्ये कलियुगे नॄणां युगह्रासानुरूपत:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
युगों के अनुसार सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग में मनुष्यों का धर्म भी भिन्न-भिन्न हो जाता है।
 
According to the passage of ages the religion of humans also becomes different in Satyayuga, Tretayuga, Dwaparayuga and Kaliyuga. 27.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)