Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.231.26: ऐसा सुना जाता है कि त्रेतायुग में वेदों के स्वाध्याय से मनुष्यों की आयु क्षीण होने लगती है, उनकी कामनाओं की प्राप्ति में बाधा पड़ती है तथा वेदों के अध्ययन का फल भी क्षीण हो जाता है॥ 26॥ | mahabharat अध्याय 12.231: शुकदेवजीका प्रश्न और व्यासजीका उनके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए कालका स्वरूप बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वेदवादाश्चानुयुगं ह्रसन्तीतीह न: श्रुतम्।
आयूंषि चाशिषश्चैव वेदस्यैव च यत्फलम्॥ २६॥
अनुवाद
ऐसा सुना जाता है कि त्रेतायुग में वेदों के स्वाध्याय से मनुष्यों की आयु क्षीण होने लगती है, उनकी कामनाओं की प्राप्ति में बाधा पड़ती है तथा वेदों के अध्ययन का फल भी क्षीण हो जाता है॥ 26॥
It is heard that in the Treta Yugas, the age of people starts decreasing due to self-study of the Vedas. Their desires are hindered in achieving them and the results of studying the Vedas also get reduced.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥