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mahabharat 12.231.25: सत्ययुग के लोग निरोगी होते हैं। उनकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और वे 400 वर्ष तक जीवित रहते हैं। त्रेतायुग आने पर उनकी आयु एक चौथाई कम होकर 300 वर्ष रह जाती है। इसी प्रकार द्वापरयुग में आयु 200 वर्ष और कलियुग में 100 वर्ष होती है।॥25॥   |   mahabharat अध्याय 12.231: शुकदेवजीका प्रश्न और व्यासजीका उनके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए कालका स्वरूप बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 231: शुकदेवजीका प्रश्न और व्यासजीका उनके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए कालका स्वरूप बताना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.231.25 
अरोगा: सर्वसिद्धार्थाश्चतुर्वर्षशतायुष:।
कृते त्रेतायुगे त्वेषां पादशो ह्रसते वय:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
सत्ययुग के लोग निरोगी होते हैं। उनकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और वे 400 वर्ष तक जीवित रहते हैं। त्रेतायुग आने पर उनकी आयु एक चौथाई कम होकर 300 वर्ष रह जाती है। इसी प्रकार द्वापरयुग में आयु 200 वर्ष और कलियुग में 100 वर्ष होती है।॥25॥
 
The people of Satyayug are disease free. All their wishes are fulfilled and they live for 400 years. When Tretayug comes, their lifespan reduces by one fourth and becomes 300 years. Similarly, in Dwaparyug, the lifespan is 200 years and in Kaliyug, the lifespan is 100 years.॥25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)