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mahabharat 12.231.20: देवताओं का एक सत्ययुग चार हजार वर्ष का होता है। एक सत्ययुग में चार सौ दिव्य वर्षों की संध्या और उतने ही वर्षों का संध्या-अन्त होता है (इस प्रकार एक सत्ययुग अड़तालीस सौ दिव्य वर्षों का होता है)।॥20॥   |   mahabharat अध्याय 12.231: शुकदेवजीका प्रश्न और व्यासजीका उनके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए कालका स्वरूप बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 231: शुकदेवजीका प्रश्न और व्यासजीका उनके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए कालका स्वरूप बताना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.231.20 
चत्वार्याहु: सहस्राणि वर्षाणां तत्कृतं युगम्।
तस्य तावच्छती संध्या संध्यांशश्च तथाविध:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
देवताओं का एक सत्ययुग चार हजार वर्ष का होता है। एक सत्ययुग में चार सौ दिव्य वर्षों की संध्या और उतने ही वर्षों का संध्या-अन्त होता है (इस प्रकार एक सत्ययुग अड़तालीस सौ दिव्य वर्षों का होता है)।॥20॥
 
A Satyayug is of four thousand years of the Gods. In a Satyayug, there is a dusk of four hundred divine years and a dusk-end of the same number of years (in this way a Satyayug is of forty-eight hundred divine years).॥20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)