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mahabharat 12.231.18-19: पहले बताई गई मनुष्यों की दिन-रात की संख्या के आधार पर अब मैं ब्रह्मा के दिन-रात का मान बता रहा हूँ। साथ ही, चारों युगों - सत्ययुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग - के वर्षों की संख्या भी अलग-अलग बता रहा हूँ॥ 18-19॥   |   mahabharat अध्याय 12.231: शुकदेवजीका प्रश्न और व्यासजीका उनके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए कालका स्वरूप बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 231: शुकदेवजीका प्रश्न और व्यासजीका उनके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए कालका स्वरूप बताना  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  12.231.18-19 
ये ते रात्र्यहनी पूर्वं कीर्तिते जीवलौकिके।
तयो: संख्याय वर्षाग्रं ब्राह्मे वक्ष्याम्यह:क्षपे॥ १८॥
पृथक् संवत्सराग्राणि प्रवक्ष्याम्यनुपूर्वश:।
कृते त्रेतायुगे चैव द्वापरे च कलौ तथा॥ १९॥
 
 
अनुवाद
पहले बताई गई मनुष्यों की दिन-रात की संख्या के आधार पर अब मैं ब्रह्मा के दिन-रात का मान बता रहा हूँ। साथ ही, चारों युगों - सत्ययुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग - के वर्षों की संख्या भी अलग-अलग बता रहा हूँ॥ 18-19॥
 
Based on the number of days and nights of humans mentioned earlier, I am now telling the value of Brahma's days and nights. Along with this, I am also telling the number of years of the four yugas - Satyayug, Treta, Dwapar and Kaliyug separately.॥ 18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)